बुधवार, 29 जुलाई 2009

हिन्दी के रखवाले - यह बी बी सी वाले

भारत में अक्सर लोगों को बी बी सी की निष्पक्षता की दुहाई देते सुना जा सकता है। हालांकि, मैंने कई बार उन्हें बढ़ा-चढ़ा कर खबरें सुनाते हुए पाया। समीक्षाएं भी अक्सर एक-तरफा हुआ करती थीं। भारत छूटा तो बी बी सी भी पीछे छूट गया। फ़िर समय बदला और इन्टरनेट का युग आया। अपने बरेली के अखबार भी रोजाना पढने को मिलने लगे तो फ़िर बी बी सी को तो आना ही था। जब भी समय मिलता है, अन्य समाचार स्रोतों के साथ बी बी सी भी पढ़ लेता हूँ। समाचार और समीक्षाओं के बारे में तो पहले ही लिख चुका हूँ। ज़्यादा नहीं लिखूंगा क्योंकि यह विकलांगता तो उनकी सम्पादकीय नीति का हिस्सा हो सकती है। मगर यह मेरी समझ में नहीं आता कि उनके हिन्दी समाचारों में हर तरफ़ वर्तनी, व्याकरण, प्रूफ़-रीडिंग आदि की गलतियाँ इतनी इफरात में क्यों होती हैं।

कमाल की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े समाचार स्रोतों में से एक होने का दावा करने वाले बी बी सी को अपने हिन्दी खंड के सम्पादकीय विभाग के लिए कोई जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिलते। रोज़ ऐसी गलतियाँ झेलते-झेलते आज मुझे लगा कि उनके कुछ पृष्ठों की झलकियाँ आपके साथ बाँट लूँ। चित्र पर क्लिक करके उसका बड़ा रूप देखा जा सकता है।

लापरवाही की पहली गवाही मुखपृष्ठ पर: दुनिया की सबसे बड़ी सर्ज इंजिन गूगल


अरे कोई तो इन्हें बताओ कि सही शब्द "प्रयोग" है, "प्रोयग" या "प्रोयोग" नहीं


अब ज़रा यह प्रयोग भी मुलाहिजा फरमाएं:
सूबा सरहद को इसलिए चुना गया क्योंकि वह जगह पंजाब की जगह ठंडी है.

21 टिप्‍पणियां:

  1. ;-)
    खूब गलतियां पकडी आपने अनुराग भाई -
    क्या ऐसी गलतियां / अशुध्धियाँ ,
    अन्य भाषाओं में भी रहती होंगीं ?
    यूं तो बी बी सी विश्व की कई भाषा में
    समाचार प्रसारित करता है ना ?
    --
    - लावण्या

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  2. हिन्दी यूनीकोड में जब हिन्दी शब्दकोश समाहित होगा तभी एसी अशुद्धियां दूर होंगी

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  3. आश्चर्य है बी बी सी ने हिन्दी के अधकचरे ज्ञानियों की भीड़ जुटा ली है -यह साझा करने के लिए शुक्रिया !

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  4. वाकई एक पुरानी और अच्छी सेवा से इस तरह की तो उम्मीद नहीं है।

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  5. लगता है हम हिंदी वाले वर्तनी को लेकर उतने आग्रहशील नहीं है.
    आपकी पीड़ा को साझा करने का मन करता है.

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  6. आपने एक बहुत ही जायज समस्या की तरफ़ ध्यान खींचा है. अब पता नही ये सब BBC किसी तयशुदा रणनिती के तहत कर रहा है या अन्य कोई तकनिकी या अन्य किस्म की मजबूरी के तहत ऐसा हो रहा है.

    रामराम.

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  7. बीबीसी हिंदी में एक पत्रिका भी निकालता है, बीबीसी इंडिया। कागज एकदम ग्लोसी और कीमती। छपाई-मुद्रण अव्वल दर्जे का। कीमत मुफ्त। पर उसमें भी भाषा की गरिमा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। प्रूफ की गलतियां तो हैं ही, सामग्री को देखते ही पता भी चल जाता है कि वह अंग्रेजी से अनूदित है और वह भी बहुत ही खराब तरीके से अनूदित है।

    एक समय बीबीसी की हिंदी को मानक माना जाता था। मैं स्वयं जब हिंदी सीख रहा था, नियमित रूप से बीबीसी हिंदी का पंद्रह मिनट का रेडियो कार्यक्रम बड़े गौर से सुना करता था। तब के बीबीसी के अधिकांश उद्घोषक पहले आकाशवाणी में काम कर चुके होते थे, इसलिए हिंदी पर उनकी मास्टरी थी। अब कई दिनों से रेडियो सुनना ही छूट गया है, इसलिए कह नहीं सकता कि बीबीसी रेडियो की हिंदी कैसी है। आजकल भारत में निजी क्षेत्र में शुरू हुए रेडियो चैनलों के जोकियों की हिंग्रेजी की तरह की यदि बीबीसी रेडियो की हिंदी है, तो वह काफी दुर्भाग्यपूर्ण बात होगी। उससे तो अच्छा यही रहेगा कि बीबीसी अपना हिंदी प्रसारण ही बंद कर दे।

    पैसे की तंगी शायद बीबीसी को और यूके की कई संस्थाओं को क्वालटी के मामले में कन्नी काटने को मजबूर कर रही है।

    अभी कुछ दिन पहले यहां खबर आई थी कि आक्सफोर्ड ने अपना संस्कृत स्कूल बंद कर दिया है, शायद आर्थिक कारणों से।

    अच्छी हिंदी की उम्मीद हमें विदेशियों से न रखकर स्वयं अपने देश की पत्र-पत्रिकाओं, पुस्तकों, पाठ्यपुस्तकों, ब्लोगों आदि से रखनी चाहिए।

    आखिर हम भी कहां उनकी भाषा अंग्रेजी की टांग तोड़ने में कोई कसर बाकी रखते हैं।

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  8. बी.बी.सी. एक ज़माने मैं शायद १९८० तक अच्छी और निष्पक्ष हुआ करती थी | बी.बी.सी.का एक तरफा विचार सुन-सुन कर इतना पाक गया की अब समय मिलने पर इसकी साईट भी नहीं खोलता हूँ |

    आज के समय मैं सच्चा और निष्पक्ष समाचार ढूंढना टेढी खीर है |

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  9. अब तो कमेन्ट देते हुये भी डर लगता है पता नहीं आप हमारी कितनी गलतियाँ जग जाहिर कर देंगे ---- बहुत बडिया आलेख है आभार

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  10. अनुराग शर्मा जी!
    बी बी सी है तो वर्तनी की गल्तियाँ तो होंगी ही।
    प्रूफ रीडिंग के लिए मेरा नाम सुझा दो ना।

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  11. हिन्दी की दुर्गति पहले विज्ञापनों, सिनेमा में देखने को मिलती थी, अब हिन्दी के खबरिया चैनल भी इसी में लगे हुये हैं. काश यह एक हिन्दी के अच्छे जानकार को अपने यहां पे-रोल पर रख लें जिससे वर्तनी तथा व्याकरण सम्बन्धी अशुद्धियां न हों.

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  12. @शास्त्री जी,
    सुनने में आया है की बी बी सी हिंदी की सलमा जैदी अक्सर यह ब्लॉग पढ़ती हैं - अगर यह सच है तो अब तक आप की टिप्पणी उन तक पहुँच चुकी होगी. अब आगे उनकी मर्जी.

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  13. @निर्मला जी,
    हम व्यक्तिगत/शौकिया ब्लॉग लिखने वालों और कर्मचारियों की एक फौज और मशीनों का एक तामझाम लेकर व्यावसायिक रूप से लिखने वालों में एक फर्क होता है. मसलन, व्यावसायिक साइट्स पर, पूर्ण-विराम कहाँ लगेगा इसका भी एक नियम होता है - अगर आप बी बी सी के मुखपृष्ठ (प्रथम चित्र) को देखेंगी तो पाएंगी कि उस एक पेज पर अलग-अलग जगहों पर पूर्ण विराम तीन अलग तरह से लगा हुआ है.

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  14. वाजिब सवाल है .किसी भी ऐसी न्यूज़ एजेंसी का जिसकी विश्व भर में साख है ...ज्यादा जिम्मेदारिया बनती है .वैसे भी शब्द ओर वर्तनी का हेर फेर किसी भी लेख का अनर्थ कर सकता है

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  15. बीबीसी उन साइट्स में से हैं जहाँ अक्सर दिन में कई बार जाना होता है. पर अतानु डे के ब्लॉग पर और एक बार अकबर खान द्बारा टाईम्स ऑफ़ इंडिया में जब बीबीसी की निष्पक्षता पर सवाल पढ़े तब से वो बात नहीं रही ! बीबीसी तो अभी तक अजमल कसाब को आतंकवादी नहीं गनमैन और चरमपंथी कहती है. और एक छोटी सी भी घटना कहीं और हो तो होने के पहले ही आतंकवादी घटना हो जाती है. कई ऐसी बातें पढ़कर ... बीबीसी से लगाव ख़त्म सा हो गया है.

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  16. अनुराग जी
    हिंदी की वर्तनी में अशुद्धि और व्याकरण की बात तो है ही दुखी करने लायक लेकिन अगर आप भारत का नक्शा देखें और उसमें कश्मीर की हालत देखे तो आसमान से गिर पड़ेंगे. हाँ एक समय था जब बी बी सी की एक अच्छी छवि थी लेकिन अब ?????
    ये भी देखिएगा और बताइयेगा :
    BBC's map: Northern Kashmir is termed as "Pakistani Kashmir". This land is well-knowned as Pakistan Occupied Kashmir (POK). But BBC has called it as "Pakistani" ie. belonging to Pakistan. Legally complete Jammu and Kashmir State belongs to India. Also BBC is silent about China occupied Kashmir.
    मैं २ मैप भी ईमेल कर रही हूँ , देखिएगा ..
    आपका लेख बहुत ही सार्थक और ज्वलंत है...हमेशा की तरह...

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  17. @लावण्या जी,
    नहीं , BBC को ऐसी विशेष बेरुखी केवल हिन्दी के साथ ही है.

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  18. आपने खूब चेताया.... अच्छा किया... साधुवाद बंधु..

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  19. अंतर्राष्‍ट्रीय ब्रांड टिकाऊ और भरोसेमंद हो ऐसा होना जरुरी तो नहीं तो फिर बी बी सी का भरोसा क्‍यों। अच्‍छे लेख के लिए धन्‍यवाद और शुभकामनाएं।

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