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रविवार, 2 मई 2010

ब्लॉगस्पॉट वाला ब्लॉग नहीं खुल रहा है?

चीन या पाकिस्तान में ब्लागस्पाट डोट कॉम पर प्रतिबन्ध लगा हो, यह बात तो समझ में आती है मगर यदि यह समस्या भारत में आ रही हो तो क्या कहा जाए? आज सुबह से कई ब्लोगों पर पोस्ट या टिप्पणी में इसका ज़िक्र देखा तो लगा कि समस्या काफी व्यापक है. अब यह तो नहीं पता कि रिलायंस के ग्राहकों को यह परेशानी क्यों है? क्या रिलायंस भारतीय ब्लोगरों या गूगल से नाराज़ है? इतना तो पता नहीं मगर यदि आपके कम्प्यूटर से बहुत सी अन्य साइटें सुचारू रूप से चल रही हैं तो संभवतः रिलायंस के डीएनएस (domain name servers) में तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है. उनकी ग्राहक सेवा को फोन करके अपनी समस्या बताइये और काम कराइए. मो सम कौन वाले संजय अनेजा इस मौके का भरपूर लाभ उठाते हुए वर्डप्रेस पर भी अवतरित हो गए हैं. बधाई हो! आप भी मौके का फायदा उठाते हुए उन्हें बधाई दे सकते हैं. डर बस यही है कि अगर ब्लागस्पाट डोट कॉम पर रोक जानबूझकर लगाई गयी है तो फिर वर्डप्रेस भी कितनी देर तक खैर मनायेगा?

यदि आपका इंटरनेट सेवादाता ब्लोगर डोट कौम तक नहीं पहुँच पा रहा है तो आपको Request timed out जैसा सन्देश दिखाई दे सकता है.

इस विषय पर पाबला जी की पोस्ट पर इसके संभावित कारण का ज़िक्र भी देखा. और उसी पोस्ट पर एक टिप्पणी में मौ0 उमर कैरानवी द्वारा ब्लौगवाणी के सन्दर्भ से एक संभावित हल भी दिखाई दिया. मुझे उम्मीद है कि वह हल कई लोगों के लिए कारगर साबित हो सकता है.

अगर आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता के डीएनएस (domain name servers) में तकनीकी गड़बड़ी है तो आप उनके डीएनएस की जगह पर या उसके साथ-साथ ओपन डीएनएस (OpenDNS) या गूगल डीएनएस (Google Public DNS)का प्रयोग कर सकते हैं.

NOTE: अपने कम्प्युटर के डीएनएस की संख्याओं से छेड़छाड़ करने से पहले उनके अभी के नंबर नोट कर लें ताकि मनमाफिक परिवर्तन न होने की स्थिति में आप पहले के बिंदु पर वापिस आ सकें. अगर रिलायंस इन डीएनएस तक भी नहीं पहुँच पा रहा है उस स्थिति में यह उपाय काम नहीं करेगा.

ओपन डीएनएस के आई पी पते:
208.67.222.222 और 208.67.220.220
(resolver1.opendns.com और resolver2.opendns.com)

गूगल डीएनएस के आई पी पते:
8.8.8.8 और 8.8.4.4

यदि यहाँ तक की बात आपको कठिन या अरुचिकर लगी है तो बेहतर यही होगा कि आप इस पोस्ट को इग्नोर कर दें क्योंकि एक छोटी सी गलती लाभ के बजाय हानि पहुंचा सकती है.

वैसे भी मुझे पूरी आशा है कि समस्या तात्कालिक है और रिलायंस के स्तर पर ही जल्दी ही अपने आप सुलझ जायेगी.

इसके अतिरिक्त कुछ सामान्य सुझाव:
१. एक अच्छा सा एंटी-वाइरस और एंटी-स्पायवेयर प्रोग्राम इंस्टाल करें.
२. माइक्रोसोफ्ट/विन्डोज़ अपडेट चलाकर ओएस अद्यतन करें.
३. फ्लैश, जावा, अडोबी ऐक्रोबैट आदि को अद्यतन करें.
४. गूगल क्रोम इंस्टाल करके इन्टरनेट एक्स्प्लोरर की जगह उसे ही प्रयोग करें.
५. मुफ्त के प्रोग्राम डाउनलोड करने से बचें
६. ऐसे ब्लॉग या साइटों पर जाने से बचें जिन पर क्लिक करने से कोई पॉप-अप
विज्ञापन खुलते हैं. आजकल बहुत से विज्ञापनदाता ऐसी तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं जिससे आपके कम्प्युटर की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी की पोस्ट से पता लगा कि श्रद्धेय ज्ञानदत्त जी पाण्डेय की तबियत खराब थी और उन्हें ICU में ले जाया गया था. ईश्वर की असीम अनुकम्पा से अभी वे ठीक-ठाक है. हिन्दी ब्लॉग जगत में अपने छोटे से समयांतराल में जिन कुछ लोगों के प्रति मेरी असीम श्रद्धा बनी है वे उनमें से एक हैं. ईश्वर उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ कराये! शुभकामनाएं!

बुधवार, 29 जुलाई 2009

हिन्दी के रखवाले - यह बी बी सी वाले

भारत में अक्सर लोगों को बी बी सी की निष्पक्षता की दुहाई देते सुना जा सकता है। हालांकि, मैंने कई बार उन्हें बढ़ा-चढ़ा कर खबरें सुनाते हुए पाया। समीक्षाएं भी अक्सर एक-तरफा हुआ करती थीं। भारत छूटा तो बी बी सी भी पीछे छूट गया। फ़िर समय बदला और इन्टरनेट का युग आया। अपने बरेली के अखबार भी रोजाना पढने को मिलने लगे तो फ़िर बी बी सी को तो आना ही था। जब भी समय मिलता है, अन्य समाचार स्रोतों के साथ बी बी सी भी पढ़ लेता हूँ। समाचार और समीक्षाओं के बारे में तो पहले ही लिख चुका हूँ। ज़्यादा नहीं लिखूंगा क्योंकि यह विकलांगता तो उनकी सम्पादकीय नीति का हिस्सा हो सकती है। मगर यह मेरी समझ में नहीं आता कि उनके हिन्दी समाचारों में हर तरफ़ वर्तनी, व्याकरण, प्रूफ़-रीडिंग आदि की गलतियाँ इतनी इफरात में क्यों होती हैं।

कमाल की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े समाचार स्रोतों में से एक होने का दावा करने वाले बी बी सी को अपने हिन्दी खंड के सम्पादकीय विभाग के लिए कोई जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिलते। रोज़ ऐसी गलतियाँ झेलते-झेलते आज मुझे लगा कि उनके कुछ पृष्ठों की झलकियाँ आपके साथ बाँट लूँ। चित्र पर क्लिक करके उसका बड़ा रूप देखा जा सकता है।

लापरवाही की पहली गवाही मुखपृष्ठ पर: दुनिया की सबसे बड़ी सर्ज इंजिन गूगल


अरे कोई तो इन्हें बताओ कि सही शब्द "प्रयोग" है, "प्रोयग" या "प्रोयोग" नहीं


अब ज़रा यह प्रयोग भी मुलाहिजा फरमाएं:
सूबा सरहद को इसलिए चुना गया क्योंकि वह जगह पंजाब की जगह ठंडी है.